नॉन-स्टिक पैन और कड़ाही भारतीय घरों में काफ़ी पसंद किए जाते हैं, क्योंकि इनमें कम तेल लगता है, डोसा और ऑमलेट आसानी से बनते हैं, और ये जल्दी साफ़ हो जाते हैं। लेकिन ऑनलाइन आपको इनके बारे में डराने वाले दावे भी मिलेंगे। यह गाइड मुख्यधारा की राय पर टिकी है: कोटिंग क्या है, असली खतरे क्या हैं, और वे आसान आदतें जो नॉन-स्टिक बर्तनों को सुरक्षित और लंबे समय तक चलने लायक बनाती हैं।
कोटिंग किस चीज़ से बनी होती है
ज़्यादातर नॉन-स्टिक बर्तनों में इन दो में से एक कोटिंग होती है:
| कोटिंग | यह क्या है | खूबियां | कमियां |
|---|---|---|---|
| PTFE (अक्सर “नॉन-स्टिक” नाम से, कभी-कभी किसी ब्रांड नाम के साथ बिकती है) | बहुत चिकनी, रासायनिक रूप से निष्क्रिय प्लास्टिक कोटिंग | खाना बहुत आसानी से छूटता है, देखभाल से लंबी चलती है | ज़्यादा गर्मी और धातु के चम्मचों से खराब होती है |
| सिरेमिक (sol-gel) | खनिज-आधारित कोटिंग, जो पतली परत में लगाई जाती है | इसमें PTFE नहीं होता; मध्यम गर्मी अच्छी तरह झेलती है | नॉन-स्टिक खूबी अक्सर जल्दी कम हो जाती है |
पैकेट पर आपको अक्सर “PFOA-free” लिखा दिखेगा। PFOA एक केमिकल है जो पहले PTFE कोटिंग बनाने में इस्तेमाल होता था और इससे सेहत व पर्यावरण को लेकर चिंताएं उठी थीं। कई देशों में बड़ी कंपनियों ने इसका इस्तेमाल बंद कर दिया है, इसलिए आज बिकने वाले ज़्यादातर पैन इसके बिना बनते हैं। हालांकि PFOA-free होने से पैन इस्तेमाल करने का तरीका नहीं बदलता: नीचे दी गई आदतें फिर भी लागू होती हैं।
असली खतरा क्या है: ज़्यादा गर्म होना
सामान्य खाना पकाने के तापमान पर PTFE स्थिर रहता है। चिंता तब होती है जब पैन खाना पकाने की ज़रूरत से कहीं ज़्यादा गर्म हो जाए, जो ज़्यादातर तब होता है जब इसे तेज़ आंच पर खाली छोड़ दिया जाए। खाली पैन बहुत जल्दी गर्म हो सकता है, खासकर बड़े बर्नर पर रखा पतला पैन।
जब कोटिंग बहुत ज़्यादा गर्म हो जाती है, तो यह टूटने लगती है और इससे धुआं निकल सकता है। इंसानों में इस धुएं से थोड़े समय के लिए फ़्लू जैसे लक्षण हो सकते हैं। पालतू पक्षी इस धुएं के प्रति खास तौर पर संवेदनशील होते हैं, इसलिए अगर आपके घर में पक्षी हैं तो उन्हें किचन से दूर रखें और नॉन-स्टिक पैन को कभी ज़्यादा गर्म न होने देने का खास ध्यान रखें।
अच्छी बात यह है कि इससे बचना आसान है। पैन में तेल, पानी या खाना डालकर पकाने से तापमान, तेज़ आंच पर रखे खाली पैन के मुकाबले काफ़ी कम रहता है।
भारतीय खाना बनाने के लिए सुरक्षित आदतें
- खाली नॉन-स्टिक पैन को कभी तेज़ आंच पर पहले से गर्म न करें। पहले तेल या खाना डालें, या धीमी से मध्यम आंच पर थोड़ी देर ही गर्म करें।
- धीमी से मध्यम आंच पर पकाएं। नॉन-स्टिक पैन अच्छी तरह गर्म होते हैं, इसलिए तेज़ आंच की ज़रूरत शायद ही पड़ती है।
- बर्नर को पैन के हिसाब से रखें। गैस पर लौ को पैन के तले के नीचे ही रखें, किनारों तक न जाने दें। इंडक्शन पर खाली पैन के साथ बूस्ट सेटिंग इस्तेमाल न करें।
- आंच पर रखे नॉन-स्टिक पैन को छोड़कर न जाएं, खासकर जब वह खाली हो या उसमें बस थोड़ा सा तेल हो।
- नरम करछी-चम्मच इस्तेमाल करें। लकड़ी, सिलिकॉन या नायलॉन के पलटे और करछी। धातु के चम्मच और व्हिस्क कोटिंग पर खरोंच डालते हैं।
- हर काम के लिए सही बर्तन चुनें। पूरी और पकौड़े डीप फ्राई करना, राई के ज़ोर से चटकने तक बहुत तेज़ तड़का लगाना, या तेज़ आंच पर सूखा भूनना लोहे या स्टील की कड़ाही या तड़का पैन में बेहतर होता है। हमारी कड़ाही मटीरियल गाइड बताती है कि तलने के लिए कौन सा सबसे अच्छा है।
- हवा आने-जाने दें। खाना बनाते समय किचन चिमनी या एग्ज़ॉस्ट फ़ैन चलाएं और खिड़की खोल दें। इससे किसी भी तरह के धुएं में मदद मिलती है। अगर आप चिमनी लेने की सोच रहे हैं तो हमारी किचन चिमनी खरीदने की गाइड देखें।
सफ़ाई और देखभाल
- धोने से पहले पैन को ठंडा होने दें। गर्म पैन पर ठंडा पानी डालने से तला टेढ़ा हो सकता है और कोटिंग पर दबाव पड़ता है।
- नरम स्पंज और हल्के डिशवॉश साबुन से हाथ से धोएं। स्टील वूल, घिसने वाले पाउडर और स्क्रबर से बचें।
- डिशवॉशर में न डालें, जब तक कंपनी ने पैन को डिशवॉशर-सेफ़ न बताया हो; तब भी हाथ से धोने पर कोटिंग आम तौर पर ज़्यादा चलती है।
- चिपके हुए खाने के लिए, कुछ देर गुनगुने साबुन वाले पानी में भिगोएं, या पैन में थोड़ा पानी डालकर हल्का उबालें, फिर पोंछ दें।
- ध्यान से रखें। दूसरे पैन सीधे इसके अंदर न रखें, बीच में कपड़ा या कागज़ रखें, क्योंकि रगड़ से सतह पर खरोंच आती है।
- एरोसोल कुकिंग स्प्रे न इस्तेमाल करें अगर कंपनी इसके लिए मना करती है; कुछ स्प्रे चिपचिपी परत छोड़ सकते हैं जो कोटिंग पर जमती जाती है।
नॉन-स्टिक पैन कब बदलें
इस्तेमाल के साथ नॉन-स्टिक कोटिंग घिसती जाती है। पैन कितना चलेगा, यह इस पर निर्भर करता है कि आप कितनी बार खाना बनाते हैं, कितनी आंच इस्तेमाल करते हैं और कैसे साफ़ करते हैं; अच्छी देखभाल से कई पैन कुछ साल चल जाते हैं।
| संकेत | क्या करें |
|---|---|
| कोटिंग उखड़ रही है या परतें निकल रही हैं | पैन बदल दें |
| धातु तक गहरी खरोंचें | पैन बदल दें |
| तेल और सही आंच के बावजूद खाना चिपकता है | कोटिंग घिस चुकी है; जल्दी बदलें |
| तला टेढ़ा हो गया है, चूल्हे पर डगमगाता है या इंडक्शन पर सीधा नहीं बैठता | बदल दें; यह असमान रूप से गर्म होता है और शायद इंडक्शन पर काम न करे |
| सतह पर हल्के निशान या थोड़ा रंग बदलना | आम तौर पर ठीक है; ध्यान से इस्तेमाल करते रहें |
अगर गलती से आपने कोई छोटा टुकड़ा खा लिया, तो आम तौर पर इससे नुकसान की संभावना कम मानी जाती है। लेकिन जिस पैन की परतें निकल रही हों, उसमें खाना ठीक से नहीं बनता और नुकसान फैलता जाता है, इसलिए नया पैन लेने का समय आ गया है। खराब नॉन-स्टिक सतह को घर पर दोबारा कोट करने या “ठीक” करने की कोशिश न करें।
नॉन-स्टिक या कुछ और?
नॉन-स्टिक कम तेल वाले खाने, अंडे, डोसा, चीला, पोहा और खाना दोबारा गर्म करने के लिए बढ़िया है। जिन कामों में तेज़ आंच चाहिए या खट्टी चीज़ों के साथ लंबे समय तक पकाना होता है, उनके लिए दूसरे मटीरियल बेहतर हैं:
| काम | बेहतर विकल्प |
|---|---|
| डीप फ्राई करना, तेज़ आंच पर भूनना | लोहा या मोटा स्टेनलेस स्टील |
| रोटी, पराठा, डोसा (लंबे समय के लिए) | सीज़न किया हुआ लोहे का तवा; हमारी तवा सीज़निंग गाइड देखें |
| देर तक पकने वाली टमाटर या इमली की ग्रेवी | स्टेनलेस स्टील |
| कम तेल वाली सब्ज़ी, अंडे, झटपट स्टर-फ्राई | नॉन-स्टिक |
निष्कर्ष
अगर आप ठीक से इस्तेमाल करें तो नॉन-स्टिक बर्तन रोज़ के इस्तेमाल के लिए सुरक्षित माने जाते हैं। खाली पैन को ज़्यादा गर्म न करें, धीमी से मध्यम आंच पर पकाएं, नरम करछी-चम्मच इस्तेमाल करें, किचन में हवा आने-जाने दें, और कोटिंग उखड़ने, परतें निकलने या गहरी खरोंचें आने पर पैन बदल दें। बहुत तेज़ आंच वाले भारतीय खाने के लिए लोहे या स्टील का इस्तेमाल करें, इससे आपके नॉन-स्टिक पैन भी ज़्यादा चलेंगे।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या रोज़ाना नॉन-स्टिक बर्तन इस्तेमाल करना सुरक्षित है?
PTFE नॉन-स्टिक कोटिंग को आम तौर पर रोज़ के खाना पकाने के लिए सुरक्षित माना जाता है, बशर्ते आप इसे सही तरीके से इस्तेमाल करें: धीमी से मध्यम आंच पर, पैन में तेल या खाना डालकर, और नरम करछी-चम्मच के साथ। सबसे ज़रूरी बात यह है कि खाली पैन को तेज़ आंच पर गर्म न करें, इससे कोटिंग खराब हो सकती है और धुआं निकल सकता है।
अगर गलती से नॉन-स्टिक कोटिंग का टुकड़ा खा लिया तो क्या होगा?
छोटे टुकड़ों से आम तौर पर नुकसान होने की संभावना कम मानी जाती है, क्योंकि कोटिंग बहुत निष्क्रिय (inert) होती है और माना जाता है कि शरीर इसे सोखता नहीं है। लेकिन जिस पैन की कोटिंग उखड़ रही हो, उसमें खाना ठीक से नहीं बनता और नुकसान बढ़ता ही जाता है, इसलिए उसे बदलने का समय आ गया है।
नॉन-स्टिक पैन को कब फेंक देना चाहिए?
जब कोटिंग साफ़ तौर पर उखड़ रही हो, परतें निकल रही हों या धातु तक गहरी खरोंचें हों, जब कुछ भी करने पर खाना चिपकता हो, या जब पैन का तला टेढ़ा हो गया हो, तब इसे बदल दें। सिर्फ़ हल्के निशानों की वजह से पैन फेंकने की ज़रूरत नहीं है।
क्या सिरेमिक नॉन-स्टिक पैन PTFE से ज़्यादा सुरक्षित हैं?
सिरेमिक कोटिंग एक अलग मटीरियल है और इसमें PTFE नहीं होता। सामान्य इस्तेमाल में दोनों को सुरक्षित माना जाता है। सिरेमिक कोटिंग की नॉन-स्टिक खूबी अक्सर जल्दी खत्म हो जाती है, जबकि PTFE ज़्यादा गर्मी के प्रति ज़्यादा संवेदनशील है। दोनों ही मामलों में धीमी से मध्यम आंच और हल्के हाथ से देखभाल करने पर ये ज़्यादा चलते हैं।