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मैनुअल बनाम इलेक्ट्रिक कॉफ़ी ग्राइंडर: बर, ब्लेड और आपको क्या चाहिए

मैनुअल या इलेक्ट्रिक, बर या ब्लेड: कॉफ़ी ग्राइंडर पिसाई, स्पीड, शोर और कीमत में कैसे अलग हैं, फ़िल्टर कॉफ़ी के लिए कैसी पिसाई चाहिए, और घर पर क्या ज़रूरी है।

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इलेक्ट्रिक बर ग्राइंडर के हॉपर में डाले जा रहे कॉफ़ी बीन्स

पीसने के कुछ ही देर बाद कॉफ़ी अपनी खुशबू खोने लगती है, इसीलिए कॉफ़ी के शौकीन लोग बनाने से ठीक पहले पीसते हैं। लेकिन हर घर को ग्राइंडर की ज़रूरत नहीं होती, और हर ग्राइंडर खरीदने लायक नहीं होता। यहां देखिए कि अलग-अलग विकल्प आपस में कैसे हैं।

बर बनाम ब्लेड: असली फ़र्क

ब्लेड ग्राइंडर: घूमता हुआ ब्लेड, मिक्सर ग्राइंडर के ड्राई जार की तरह, बीन्स को टुकड़ों में काटता है। जितनी देर चलाएं, उतना बारीक होता है, लेकिन आख़िर में हमेशा पाउडर और बड़े टुकड़ों का मिश्रण ही मिलता है। बारीक कण ज़्यादा निकल जाते हैं (कड़वा) और मोटे कण कम निकलते हैं (खट्टा या हल्का)।

बर ग्राइंडर: बीन्स दो खुरदरी सतहों, यानी बर के बीच से गुज़रते हैं, जो एक तय दूरी पर सेट होती हैं। हर कण लगभग एक ही साइज़ का निकलता है, और गैप बदलकर आप साइज़ सेट करते हैं।

ब्लेड ग्राइंडरबर ग्राइंडर
पिसाई कितनी एक जैसीबेतरतीबएक जैसी
पिसाई के साइज़ पर कंट्रोलसिर्फ़ समय सेसेटिंग से
किसके लिए सबसे अच्छाकाम चलाऊ फ़िल्टर कॉफ़ी, मसालेएस्प्रेसो समेत हर तरीका
आम कीमतकमज़्यादा

बर दो आकार में आते हैं: कोनिकल (रिंग के अंदर एक कोन), जो मैनुअल ग्राइंडर में आम है, और फ़्लैट (दो सपाट डिस्क), जो कुछ इलेक्ट्रिक ग्राइंडर में आम है। दोनों अच्छा पीस सकते हैं। बर आमतौर पर स्टील या सिरेमिक के होते हैं; दोनों काम करते हैं, और मटीरियल से ज़्यादा बनावट की क्वालिटी मायने रखती है।

मैनुअल बनाम इलेक्ट्रिक

बर ग्राइंडर तय करने के बाद अगला सवाल है कि वह चलेगा कैसे।

मैनुअल बर ग्राइंडरइलेक्ट्रिक बर ग्राइंडरइलेक्ट्रिक ब्लेड ग्राइंडर
पिसाई की क्वालिटीअच्छी से बहुत अच्छीअच्छी से बहुत अच्छीबेतरतीब
स्पीडधीमी; पिसाई के साइज़ के हिसाब से हर कप के लिए एक मिनट या ज़्यादा घुमानातेज़; कुछ सेकंडतेज़; कुछ सेकंड
मेहनतहैंडल आप घुमाते हैंबटन दबाएंबटन दबाएं
शोरशांततेज़तेज़
साथ ले जानाआसानी से ले जा सकते हैं; बिजली नहीं चाहिएसॉकेट चाहिए; ज़्यादा भारी-भरकमकॉम्पैक्ट
क्षमताकम; आमतौर पर एक बार में एक-दो कप के लिए काफ़ीबड़ा हॉपरकम
एस्प्रेसो जितनी बारीक पिसाईअच्छे मॉडल से संभव, लेकिन मेहनत वालाहां, एस्प्रेसो वाले मॉडल सेनहीं
कीमतउसी क्वालिटी की पिसाई के लिए कमज़्यादासबसे कम

मॉडल के हिसाब से कीमतें बहुत अलग होती हैं। भारत में क्या उपलब्ध है, इसके लिए मौजूदा लिस्टिंग देखें।

किस तरीके के लिए कैसी पिसाई

आप कोई भी ग्राइंडर चुनें, पिसाई को कॉफ़ी बनाने के तरीके से मिलाएं। हमारी कॉफ़ी रोस्ट और ग्राइंड गाइड में इसकी ज़्यादा जानकारी है।

बनाने का तरीकापिसाई का साइज़छूने में कैसी
एस्प्रेसोबारीकटेबल नमक से थोड़ी बारीक; चुटकी में लेने पर थोड़ी चिपकती है
साउथ इंडियन फ़िल्टर कॉफ़ीमीडियम-बारीक से बारीकबारीक, लेकिन पाउडर जैसी नहीं
मोका पॉटमीडियम-बारीकबारीक रेत जैसी
पोर-ओवरमीडियममोटी रेत जैसी
फ़्रेंच प्रेस, कोल्ड ब्रूमोटीमोटे नमक या ब्रेडक्रम्ब्स जैसी

फ़िल्टर कॉफ़ी के लिए, बर ग्राइंडर से आप टपकने की रफ़्तार ठीक से सेट कर सकते हैं। अगर डिकॉक्शन 10–20 मिनट से बहुत ज़्यादा समय लेता है, तो मोटा पीसें; अगर जल्दी निकल जाता है और पतला लगता है, तो बारीक पीसें। बाकी तरीका हमारी स्टेप-बाय-स्टेप फ़िल्टर कॉफ़ी गाइड में है। मोका पॉट के लिए हमारी मोका पॉट गाइड देखें।

किसे कौन-सा लेना चाहिए

अगर आप…यह देखें
दिन में एक-दो कप पीते हैं और एक मिनट की मेहनत से परहेज़ नहींमैनुअल बर ग्राइंडर
हर सुबह पूरे परिवार के लिए कॉफ़ी बनाते हैंइलेक्ट्रिक बर ग्राइंडर
एस्प्रेसो बनाते हैंएस्प्रेसो के लिए बना इलेक्ट्रिक बर ग्राइंडर
सफ़र करते हैं या ऑफ़िस में ताज़ा पीसना चाहते हैंमैनुअल बर ग्राइंडर
ज़्यादातर पहले से पिसे पाउडर की फ़िल्टर कॉफ़ी पीते हैंग्राइंडर की ज़रूरत नहीं; छोटे, ताज़ा पैकेट खरीदें
ज़्यादा खर्च किए बिना ताज़ा बीन्स आज़माना चाहते हैंशुरुआत के लिए अपने मिक्सर ग्राइंडर का छोटा ड्राई जार, पल्स में

कॉफ़ी के लिए मिक्सर ग्राइंडर का इस्तेमाल

ज़्यादातर भारतीय रसोई में पहले से एक ब्लेड ग्राइंडर होता है: मिक्सर ग्राइंडर का छोटा या मीडियम ड्राई जार। शुरुआत के लिए यह ठीक है:

  • पक्का करें कि जार पूरी तरह सूखा हो और उसमें मसाले की गंध न हो। कॉफ़ी आसानी से गंध पकड़ लेती है।
  • छोटे-छोटे पल्स में पीसें और बीच-बीच में जार हिलाएं, ताकि बीन्स गर्म न हों।
  • सिर्फ़ उतना ही पीसें जितना उस दिन इस्तेमाल करेंगे।

पिसाई एक जैसी नहीं होगी। फ़िल्टर कॉफ़ी और फ़्रेंच प्रेस के लिए चल जाती है, लेकिन एस्प्रेसो के लिए नहीं। कौन-सा जार इस्तेमाल करें, इसके लिए हमारी जार और ब्लेड गाइड देखें।

देखभाल और सफ़ाई

  • बर को पानी से न धोएं, जब तक मैनुअल में इसकी इजाज़त न हो। स्टील के बर में जंग लग सकता है। इसकी जगह सूखे ब्रश का इस्तेमाल करें।
  • नियमित रूप से साफ़ करें। कॉफ़ी का तेल बासी हो जाता है और स्वाद बिगाड़ सकता है।
  • अपने कॉफ़ी ग्राइंडर में मसाले पीसने से बचें; गंध रह जाती है।
  • बीन्स को गर्मी, रोशनी और नमी से दूर एयरटाइट डिब्बे में रखें, जो उमस भरे भारतीय मानसून में ख़ास तौर पर ज़रूरी है।

निष्कर्ष

सबसे पहले ब्लेड की जगह बर चुनें; स्वाद में सबसे बड़ा फ़र्क इसी से पड़ता है। फिर अगर आप एक-दो कप बनाते हैं और पैसे बचाना चाहते हैं तो मैनुअल चुनें, या अगर कई लोगों के लिए बनाते हैं या एस्प्रेसो बनाते हैं तो इलेक्ट्रिक। और अगर आप ताज़ा, पहले से पिसे पाउडर की फ़िल्टर कॉफ़ी से खुश हैं, तो ग्राइंडर की ज़रूरत ही नहीं।

हमने कैसे चुना

हमने इन ग्राइंडर टाइप्स की तुलना इस आधार पर की कि ये कैसे काम करते हैं, भारत में बिकने वाले मॉडल्स के लिए कंपनियां कौन-सी स्पेसिफ़िकेशन बताती हैं, और घर पर फ़िल्टर कॉफ़ी, मोका पॉट और एस्प्रेसो के लिए कॉफ़ी पीसने का हमारी टीम का अपना अनुभव क्या है। हम यहां किसी ख़ास ब्रांड की रैंकिंग नहीं करते, और किसी ब्रांड ने शामिल होने के लिए पैसे नहीं दिए।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या मिक्सर ग्राइंडर में कॉफ़ी बीन्स पीस सकते हैं?

हां, छोटे या ड्राई जार में, छोटे-छोटे पल्स देकर। यह ब्लेड ग्राइंडर की तरह काम करता है, इसलिए पिसाई एक जैसी नहीं होती, लेकिन साउथ इंडियन फ़िल्टर कॉफ़ी के लिए चल जाती है। एस्प्रेसो के लिए यह काफ़ी एक जैसी नहीं होती।

क्या मैनुअल बर ग्राइंडर इलेक्ट्रिक ब्लेड ग्राइंडर से बेहतर है?

पिसाई की क्वालिटी के लिए आमतौर पर हां। मैनुअल बर ग्राइंडर ब्लेड ग्राइंडर से कहीं ज़्यादा एक जैसी पिसाई करता है। बदले में समय और मेहनत लगती है: हैंडल आपको खुद घुमाना पड़ता है।

साउथ इंडियन फ़िल्टर कॉफ़ी के लिए कैसी पिसाई चाहिए?

मीडियम-बारीक से बारीक, एस्प्रेसो से थोड़ी मोटी। अगर डिकॉक्शन बहुत धीरे टपकता है या बिल्कुल नहीं टपकता, तो पिसाई बहुत बारीक है; अगर जल्दी निकल जाता है और स्वाद हल्का लगता है, तो बहुत मोटी है।

क्या ग्राइंडर की ज़रूरत है भी?

ज़रूरी नहीं। भारत में बहुत से रोस्टर और लोकल कॉफ़ी की दुकानें आपके लिए ताज़ा बीन्स पीस देती हैं, और ज़्यादातर फ़िल्टर कॉफ़ी पीने वाले पहले से पिसा पाउडर खरीदते हैं। ग्राइंडर सबसे ज़्यादा तब काम आता है जब आप सबसे ताज़ा स्वाद चाहते हैं या एस्प्रेसो बनाते हैं।

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