मोका पॉट घर पर स्ट्रॉन्ग कॉफ़ी बनाने के सबसे सस्ते तरीकों में से एक है। इसे बिजली नहीं चाहिए, यह साधारण LPG बर्नर पर चलता है, और लगभग पांच मिनट लेता है। अगर आपको स्ट्रॉन्ग, दूध वाली कॉफ़ी पसंद है लेकिन एस्प्रेसो मशीन नहीं चाहिए, तो यह अच्छा बीच का रास्ता है (तीनों विकल्पों की तुलना हमने अपनी फ़िल्टर कॉफ़ी बनाम एस्प्रेसो गाइड में की है)।
मोका पॉट कैसे काम करता है
मोका पॉट के तीन हिस्से होते हैं:
- नीचे वाला हिस्सा (बॉयलर): इसमें पानी रहता है और किनारे पर एक छोटा सेफ़्टी वाल्व होता है।
- फ़नल बास्केट: इसमें पिसी कॉफ़ी रहती है और यह नीचे वाले हिस्से के अंदर बैठती है।
- ऊपर वाला हिस्सा (कलेक्टर): यह ऊपर कसा जाता है, और इसके नीचे मेटल की फ़िल्टर प्लेट और रबर गैसकेट होती है।
पानी गर्म होने पर नीचे वाले हिस्से में भाप बनती है और गर्म पानी को कॉफ़ी से होते हुए ऊपर वाले हिस्से में धकेलती है। प्रेशर एस्प्रेसो मशीन से बहुत कम होता है, इसीलिए नतीजा स्ट्रॉन्ग और गाढ़ा होता है, लेकिन एस्प्रेसो नहीं। तेज़, हल्की कड़वी कॉफ़ी की उम्मीद रखें, जिसमें क्रेमा बहुत कम या बिल्कुल न हो।
गैस या इंडक्शन: सही पॉट चुनना
| पॉट का मटीरियल | गैस पर चलता है? | इंडक्शन पर चलता है? | ध्यान दें |
|---|---|---|---|
| एल्युमिनियम (क्लासिक) | हां | नहीं | हल्का, जल्दी गर्म होता है, आमतौर पर सस्ता। सिर्फ़ हाथ से धोएं। |
| मैग्नेटिक तले वाला स्टेनलेस स्टील | हां | हां | ज़्यादा भारी, ज़्यादा टिकाऊ, कुछ मामलों में डिशवॉशर में धो सकते हैं (कंपनी के निर्देश देखें)। |
| तले पर स्टील प्लेट वाला एल्युमिनियम | हां | आमतौर पर | देख लें कि उस पर इंडक्शन-कम्पैटिबल लिखा हो। |
चुंबक टेस्ट: अगर फ़्रिज का चुंबक तले पर मज़बूती से चिपक जाए, तो पॉट के इंडक्शन पर चलने की पूरी संभावना है। एल्युमिनियम मैग्नेटिक नहीं होता, इसलिए सादा एल्युमिनियम पॉट इंडक्शन कुकटॉप पर बिल्कुल गर्म नहीं होगा। इस बारे में और जानने के लिए हमारी इंडक्शन-कम्पैटिबल बर्तन गाइड देखें।
कुछ लोग एल्युमिनियम पॉट को इंडक्शन पर चलाने के लिए सपाट मेटल की एडॉप्टर डिस्क इस्तेमाल करते हैं। यह काम कर सकता है, लेकिन धीमा और कम असरदार है, इसलिए अगर इंडक्शन आपका मुख्य कुकटॉप है तो स्टील पॉट आसान विकल्प है।
साइज़: मोका पॉट “कप” के हिसाब से बिकते हैं, जिसका मतलब छोटे एस्प्रेसो साइज़ के कप हैं, मग नहीं। 3-कप पॉट में इतनी गाढ़ी कॉफ़ी बनती है कि लगभग एक या दो मग दूध वाली कॉफ़ी बन जाए। पॉट तभी सबसे अच्छा काम करता है जब उसे उसकी पूरी क्षमता तक भरा जाए, इसलिए वही साइज़ खरीदें जो आप हर बार सच में इस्तेमाल करेंगे।
कॉफ़ी और पिसाई
- पिसाई: मीडियम-बारीक, एस्प्रेसो से थोड़ी मोटी, और साउथ इंडियन फ़िल्टर कॉफ़ी पाउडर जैसी या उससे थोड़ी मोटी। बहुत बारीक हो तो पानी मुश्किल से निकलता है और कप कड़वा, ज़्यादा निकला हुआ बनता है। बहुत मोटी हो तो कॉफ़ी पतली और खट्टी बनती है।
- रोस्ट: मीडियम से डार्क रोस्ट मोका पॉट के तेज़ स्वाद के साथ अच्छे लगते हैं, ख़ासकर दूध वाली कॉफ़ी के लिए। हमारी रोस्ट और ग्राइंड गाइड में विकल्प समझाए गए हैं।
- चिकोरी ब्लेंड: इस्तेमाल कर सकते हैं, लेकिन बहुत ज़्यादा चिकोरी वाले बहुत बारीक पाउडर बास्केट को बंद कर सकते हैं। आज़माकर देखें और बदलें।
- ताज़गी: छोटे पैकेट खरीदें और गर्मी व रोशनी से दूर एयरटाइट रखें।
स्टेप बाय स्टेप
- नीचे वाले हिस्से में पानी भरें, सेफ़्टी वाल्व से ठीक नीचे तक। वाल्व को कभी न ढकें। कुछ लोग पहले से गर्म पानी इस्तेमाल करते हैं, जिससे कॉफ़ी कम देर आंच पर रहती है और कड़वाहट कम हो सकती है। अगर आप ऐसा करते हैं, तो गर्म तले को कपड़े से पकड़ें।
- बास्केट में कॉफ़ी भरें, जब तक वह किनारे के बराबर न हो जाए। उसे बैठाने के लिए हल्के से थपथपाएं और ऊपर से उंगली से समतल करें। दबाएं या प्रेस न करें।
- किनारे को पोंछ दें ताकि किनारे पर कोई पाउडर न रहे, वरना यह ठीक से सील नहीं होगा।
- ऊपर वाला हिस्सा कसकर लगाएं, हैंडल के बजाय नीचे वाले हिस्से को पकड़कर।
- धीमी से मीडियम आंच पर गर्म करें। गैस पर लौ तले के नीचे ही रहनी चाहिए, कभी भी किनारों तक ऊपर न आए (इससे हैंडल ख़राब हो सकता है)। इंडक्शन पर मीडियम सेटिंग रखें।
- ढक्कन खुला रखें और देखते रहें। कॉफ़ी गहरी, गाढ़ी धार में निकलने लगेगी।
- जैसे ही धार हल्के रंग की हो और गुड़गुड़ाने या फुसफुसाने लगे, आंच से उतार लें। ज़्यादा देर छोड़ने से कड़वा स्वाद निकल आता है।
- चाहें तो: ब्रूइंग जल्दी रोकने के लिए तले को थोड़ी देर ठंडे नल के नीचे या गीले कपड़े पर ठंडा करें।
- डालने से पहले ऊपर वाले हिस्से में कॉफ़ी को चला लें, क्योंकि शुरू और आख़िर का हिस्सा अलग स्वाद का होता है।
दूध वाले कप के लिए, मोका कॉफ़ी को गर्म, झागदार दूध और स्वाद अनुसार चीनी के साथ मिलाएं, लगभग वैसे ही जैसे फ़िल्टर कॉफ़ी के डिकॉक्शन के साथ करते हैं।
आम गलतियां
| गलती | क्या होता है | समाधान |
|---|---|---|
| कॉफ़ी को दबाना | पानी नहीं निकल पाता; कड़वी कॉफ़ी; वाल्व पर ज़ोर | कॉफ़ी समतल करें, दबाएं नहीं |
| बहुत तेज़ आंच | जल्दबाज़ी में बनी, जली-सी कॉफ़ी | धीमी से मीडियम आंच |
| बहुत बारीक पिसाई | धीमी, कड़वी, फुसफुसा सकती है | थोड़ा मोटा पीसें |
| वाल्व से ऊपर पानी भरना | वाल्व ठीक से काम नहीं कर पाता | उससे ठीक नीचे तक भरें |
| गुड़गुड़ाने के बाद भी आंच पर छोड़ना | तीखा, धातु जैसा स्वाद | तुरंत आंच से उतारें |
| बास्केट आधा भरना | हल्की, असमान कॉफ़ी | बास्केट पूरा भरें, या छोटा पॉट इस्तेमाल करें |
सुरक्षा
- नीचे वाले हिस्से में पानी के बिना मोका पॉट कभी गर्म न करें।
- सेफ़्टी वाल्व जांचें कि वह साफ़ हो और उसमें स्केल न जमा हो।
- गर्म रहते हुए न खोलें। खोलने से पहले ठंडा होने दें; नीचे वाला हिस्सा काफ़ी देर तक गर्म रहता है।
- जब गैसकेट सख़्त हो जाए, उसमें दरार आ जाए या जोड़ से पॉट लीक करने लगे तो गैसकेट बदलें, और अगर फ़िल्टर प्लेट मुड़ गई हो या बंद हो गई हो तो उसे भी बदलें।
सफ़ाई और देखभाल
- हर इस्तेमाल के बाद हर हिस्से को गुनगुने पानी से धोएं और दोबारा जोड़ने से पहले पूरी तरह सूखने दें। गीला रहते हुए कसकर रखने से गंध आ सकती है, और उमस भरी मानसून वाली रसोई में ज़ंग लग सकता है।
- एल्युमिनियम पॉट: बहुत से लोग साबुन से बचते हैं और सिर्फ़ पानी से धोते हैं; अगर साबुन इस्तेमाल करें, तो हल्का साबुन लें और अच्छी तरह धोएं। एल्युमिनियम पॉट डिशवॉशर में न डालें, क्योंकि इससे उनका रंग बदल सकता है और चमक चली जाती है।
- स्टेनलेस स्टील पॉट: हल्के साबुन से धो सकते हैं; डिशवॉशर के लिए कंपनी के निर्देश मानें।
- स्केल: खारे पानी वाले इलाकों में नीचे वाले हिस्से में सफ़ेद परत जम जाती है। पानी और थोड़ा सफ़ेद सिरका या साइट्रिक एसिड डालकर एक बार (बिना कॉफ़ी के) चलाने, फिर दो-एक बार सादे पानी से चलाने से आमतौर पर यह साफ़ हो जाता है। पहले अपने पॉट के निर्देश देख लें। ऐसा क्यों होता है, यह हमारी रसोई में खारे पानी की समस्याएं गाइड में बताया गया है।
- अगर फ़िल्टर प्लेट और फ़नल के छेद बंद हो जाएं, तो नरम ब्रश से साफ़ करें।
निष्कर्ष
मोका पॉट बहुत कम पैसों में स्ट्रॉन्ग, एस्प्रेसो जैसी कॉफ़ी बनाता है। गैस के लिए एल्युमिनियम चुनें या इंडक्शन इस्तेमाल करते हैं तो मैग्नेटिक तले वाला स्टेनलेस स्टील। मीडियम-बारीक पिसाई रखें, दबाएं नहीं, आंच धीमी रखें और गुड़गुड़ाते ही उतार लें। हर इस्तेमाल के बाद साफ़ करके सुखाएं, और यह सालों चलेगा।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या मोका पॉट की कॉफ़ी एस्प्रेसो जैसी ही होती है?
नहीं। मोका पॉट भाप के जिस प्रेशर से काम करता है, वह एस्प्रेसो मशीन के लगभग 9 बार से बहुत कम होता है, इसलिए इससे स्ट्रॉन्ग, गाढ़ी कॉफ़ी बनती है जो एस्प्रेसो के करीब है लेकिन बिल्कुल वैसी नहीं। इसमें आमतौर पर क्रेमा बहुत कम या बिल्कुल नहीं होता। दूध वाली कॉफ़ी में यह बहुत अच्छी लगती है।
क्या मोका पॉट इंडक्शन कुकटॉप पर चल सकता है?
सिर्फ़ तभी, जब उसका तला मैग्नेटिक हो। पारंपरिक एल्युमिनियम मोका पॉट इंडक्शन पर नहीं चलते। मैग्नेटिक तले वाले स्टेनलेस स्टील मोका पॉट, या जिन पर इंडक्शन-कम्पैटिबल लिखा हो, वे चलते हैं। खरीदने से पहले चुंबक से जांच लें।
क्या मोका पॉट में कॉफ़ी को दबाना चाहिए?
नहीं। बास्केट को बराबर भरें और ऊपर से उंगली से समतल कर दें, लेकिन दबाएं नहीं। दबी हुई कॉफ़ी पानी का रास्ता रोकती है, कॉफ़ी को कड़वा बनाती है और सेफ़्टी वाल्व पर ज़्यादा ज़ोर डालती है।
मोका पॉट की कॉफ़ी कड़वी या जली हुई क्यों लगती है?
आम वजहें हैं: बहुत तेज़ आंच, बहुत बारीक पिसी कॉफ़ी, फुसफुसाने लगने के बाद भी पॉट को आंच पर छोड़ देना, या गंदा पॉट। धीमी से मीडियम आंच, मीडियम-बारीक पिसाई रखें, और जैसे ही कॉफ़ी हल्के रंग की होकर गुड़गुड़ाने लगे, आंच से उतार लें।