हर एक कैसे काम करता है
साउथ इंडियन फ़िल्टर कॉफ़ी: स्टील या पीतल का दो हिस्सों वाला फ़िल्टर। आप ऊपर वाले हिस्से में कॉफ़ी पाउडर (अक्सर कॉफ़ी-चिकोरी ब्लेंड) डालते हैं, हल्का दबाते हैं, उबलता पानी डालते हैं, और उसे 10–20 मिनट धीरे-धीरे टपकने देते हैं। इससे गाढ़ा, स्ट्रॉन्ग डिकॉक्शन बनता है, जिसे आप गरम दूध और चीनी में मिलाते हैं, फिर दबरा और टम्बलर के बीच उड़ेलकर झाग बनाते हैं।
एस्प्रेसो: एक मशीन गरम पानी को बारीक पिसी, कसकर दबाई गई कॉफ़ी में से लगभग 9 बार प्रेशर पर करीब 25–30 सेकंड तक धकेलती है। इससे एक छोटा, गाढ़ा शॉट बनता है जिसके ऊपर क्रेमा होता है। यही कैपुचीनो, लाटे और अमेरिकानो का बेस है।
मोका पॉट: चूल्हे पर रखा जाने वाला पॉट, जो भाप के दबाव से पानी को कॉफ़ी में से ऊपर धकेलता है। यह लगभग 5 मिनट में स्ट्रॉन्ग, एस्प्रेसो जैसी कॉफ़ी बनाता है। यह असली एस्प्रेसो नहीं है, लेकिन दूध के साथ बेहतरीन लगती है।
आमने-सामने
| फ़िल्टर कॉफ़ी | मोका पॉट | एस्प्रेसो मशीन | |
|---|---|---|---|
| सेटअप का खर्च | सबसे कम (कुछ सौ रुपये) | कम (लगभग एक हज़ार रुपये या ज़्यादा) | ज़्यादा (मशीन और ग्राइंडर, कई हज़ार रुपये से) |
| प्रति कप समय | 10–20 मिनट टपकना (बिना हाथ लगाए) | लगभग 5 मिनट | लगभग 2–5 मिनट, साथ में गरम होने का समय |
| कितना हुनर चाहिए | कम | कम से मध्यम | मध्यम से ज़्यादा |
| किसके लिए सबसे अच्छा | दूध वाली साउथ इंडियन कॉफ़ी | स्ट्रॉन्ग दूध वाली कॉफ़ी, चूल्हे पर | ब्लैक कॉफ़ी, कैपुचीनो, लाटे |
| कॉफ़ी | मीडियम-फ़ाइन पाउडर, अक्सर चिकोरी के साथ | मीडियम-फ़ाइन ग्राइंड | बारीक ग्राइंड, हो सके तो ताज़ा |
| बिजली | नहीं (बस एक केतली) | नहीं (गैस या इंडक्शन) | हाँ |
| सफ़ाई | फ़िल्टर धो लें | पॉट धोकर सुखा लें | रोज़ धोना और नियमित डीस्केलिंग |
ब्रांड और मॉडल के हिसाब से दाम में काफ़ी फ़र्क होता है। खरीदने से पहले मौजूदा लिस्टिंग देखें।
स्वाद
- फ़िल्टर कॉफ़ी: भरपूर, गाढ़ी बॉडी वाली और हल्की कड़वी, खासकर चिकोरी के साथ। इसे दूध और चीनी के साथ पीने के लिए ही बनाया जाता है।
- एस्प्रेसो: तेज़, बीन का अपना स्वाद ज़्यादा, जो बीन्स के हिसाब से फ़्रूटी, चॉकलेट जैसा या नट्स जैसा हो सकता है। बीन्स की क्वालिटी बहुत मायने रखती है।
- मोका पॉट: तेज़ और हल्की कड़वी, फ़िल्टर कॉफ़ी से ज़्यादा एस्प्रेसो के करीब, और दूध के साथ बढ़िया।
आपको कौन सा चुनना चाहिए?
| अगर आप… | चुनें |
|---|---|
| दिन में 1–2 दूध वाली कॉफ़ी पीते हैं और आसान तरीका चाहते हैं | फ़िल्टर कॉफ़ी |
| चूल्हे पर ज़्यादा स्ट्रॉन्ग, जल्दी बनने वाली दूध वाली कॉफ़ी चाहते हैं | मोका पॉट |
| कैपुचीनो और लाटे पसंद करते हैं और बनाने का मज़ा लेते हैं | एस्प्रेसो मशीन (स्टीम वैंड के साथ) |
| ज़्यादातर ब्लैक कॉफ़ी पीते हैं और बीन्स की परवाह करते हैं | एस्प्रेसो मशीन, या पोर-ओवर ड्रिपर |
| बजट कम है | फ़िल्टर कॉफ़ी, बिना किसी शक के |
बढ़िया फ़िल्टर कॉफ़ी के टिप्स
- ताज़ा पाउडर इस्तेमाल करें। छोटे पैक खरीदें और एयरटाइट रखें।
- ज़्यादा ज़ोर से न दबाएँ। पाउडर को हल्का दबाएँ, वरना पानी नीचे नहीं टपकेगा।
- उबाल आने के ठीक बाद वाला पानी इस्तेमाल करें।
- सब्र रखें। इसे पूरा टपकने दें; पहला डिकॉक्शन सबसे स्ट्रॉन्ग होता है।
- गरम दूध इस्तेमाल करें, लगभग 3 हिस्से दूध और 1 हिस्सा डिकॉक्शन, स्वाद के हिसाब से कम-ज़्यादा।
एस्प्रेसो मशीन खरीदने से पहले
- ग्राइंडर का बजट भी रखें। ताज़ा, बारीक पिसी कॉफ़ी मशीन जितनी ही मायने रखती है।
- अगर आप दूध वाली कॉफ़ी चाहते हैं तो देख लें कि स्टीम वैंड है।
- अपने शहर में सर्विस देख लें, क्योंकि एस्प्रेसो मशीनों को डीस्केलिंग और कभी-कभार रिपेयर की ज़रूरत होती है।
- ग्राइंड और मात्रा सही करने में एक-दो हफ़्ते सीखने का समय लगने की उम्मीद रखें।
निष्कर्ष
ज़्यादातर भारतीय घरों के लिए फ़िल्टर या मोका पॉट बहुत कम पैसों में रोज़ की बढ़िया कॉफ़ी बना देता है। एस्प्रेसो मशीन तभी चुनें, जब आपको कैफ़े जैसी ड्रिंक्स पसंद हों और उन्हें परफ़ेक्ट बनाने में मज़ा आता हो।
हमने कैसे चुना
हमने इन उपकरणों की तुलना इनके काम करने के तरीके, भारत में बिकने वाले मौजूदा मॉडल के लिए कंपनियों द्वारा प्रकाशित स्पेसिफ़िकेशन और रोज़ के भारतीय खाने-पीने में इन्हें इस्तेमाल करने के हमारी टीम के अपने अनुभव के आधार पर की है। हम यहाँ किसी खास ब्रांड की रैंकिंग नहीं करते, और किसी ब्रांड ने शामिल होने के लिए पैसे नहीं दिए।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या फ़िल्टर कॉफ़ी एस्प्रेसो से ज़्यादा स्ट्रॉन्ग होती है?
एस्प्रेसो का एक शॉट ज़्यादा गाढ़ा होता है, लेकिन फ़िल्टर कॉफ़ी के कप में ज़्यादातर दूध होता है और थोड़ा सा स्ट्रॉन्ग डिकॉक्शन। प्रति कप कैफ़ीन लगभग बराबर हो सकता है; यह इस पर निर्भर करता है कि आप कितना कॉफ़ी पाउडर डालते हैं और कप कितना बड़ा है।
चिकोरी क्या है और यह फ़िल्टर कॉफ़ी में क्यों होती है?
चिकोरी एक भुनी हुई जड़ है, जिसे कई साउथ इंडियन फ़िल्टर कॉफ़ी पाउडर में कॉफ़ी के साथ मिलाया जाता है। यह बॉडी, रंग और हल्का कड़वा, कैरामेल जैसा स्वाद देती है, और कॉफ़ी को ज़्यादा दिन चलाती है। आप शुद्ध कॉफ़ी या अलग-अलग मात्रा में चिकोरी वाले ब्लेंड खरीद सकते हैं।
क्या बिना मशीन के एस्प्रेसो बना सकते हैं?
असली एस्प्रेसो नहीं, जिसके लिए लगभग 9 बार प्रेशर चाहिए। मोका पॉट चूल्हे पर स्ट्रॉन्ग, एस्प्रेसो जैसी कॉफ़ी बनाता है, और दूध वाली कॉफ़ी के लिए अच्छा है।
फ़िल्टर कॉफ़ी का डिकॉक्शन कितनी देर चलता है?
ताज़ा, कुछ घंटों के अंदर इसका स्वाद सबसे अच्छा होता है। कई घरों में इसे सुबह बनाकर फ़्रिज में रख लिया जाता है और उसी दिन बाद में इस्तेमाल किया जाता है।