लगभग हर भारतीय किचन में प्रेशर कुकर होता है, और कई घरों में यह दिन में एक से ज़्यादा बार इस्तेमाल होता है। एक अच्छा कुकर 10 साल या उससे ज़्यादा चलता है, इसलिए इसे सोच-समझकर चुनना ठीक रहता है।
1. मटीरियल
| मटीरियल | फ़ायदे | नुकसान | इंडक्शन पर? |
|---|---|---|---|
| एल्युमिनियम | हल्का, सस्ता, जल्दी गर्म होता है | खट्टे खाने से रिएक्ट कर सकता है; पिचक जाता है और रंग बदलता है; कम चलता है | सिर्फ़ खास इंडक्शन बेस के साथ |
| हार्ड-एनोडाइज़्ड एल्युमिनियम | रिएक्ट नहीं करता, खरोंच-रोधी सतह; जल्दी और एक जैसा गर्म होता है | महंगा; आम तौर पर डिशवॉशर-सेफ़ नहीं; हल्के हाथ से साफ़ करना पड़ता है | सिर्फ़ खास इंडक्शन बेस के साथ |
| स्टेनलेस स्टील | बहुत टिकाऊ, रिएक्ट नहीं करता, साफ़ करना आसान, चमक बनी रहती है | भारी, महंगा; सैंडविच बेस न हो तो असमान रूप से गर्म होता है | हां, मैग्नेटिक सैंडविच बेस के साथ |
सैंडविच या ट्राई-प्लाई बेस: स्टील के तले के अंदर एल्युमिनियम या तांबे की एक परत, जो गर्मी को फैलाती है। इसके बिना स्टील कुकर में दाल या चावल नीचे से जल सकते हैं। किसी भी स्टेनलेस स्टील कुकर में यह ज़रूर देखें।
2. साइज़
| घर के सदस्य | सुझाया गया साइज़ | आम इस्तेमाल |
|---|---|---|
| 1–2 लोग | 2–3 L | दाल, थोड़े चावल, सब्ज़ियां |
| 3–5 लोग | 3–5 L | रोज़ की दाल, चावल, राजमा, छोले |
| 5+ लोग, या मेहमानों के लिए खाना | 5 L और उससे ज़्यादा | बिरयानी, ज़्यादा मात्रा, मीट |
इस्तेमाल लायक मात्रा डिब्बे पर लिखे साइज़ से कम होती है, क्योंकि कुकर को ऊपर तक नहीं भरा जा सकता (सुरक्षा वाला हिस्सा देखें)। अगर आप रोज़ दाल और चावल बनाते हैं, तो एक बड़े कुकर की बजाय दो कुकर (एक छोटा और एक मीडियम) अक्सर ज़्यादा काम के होते हैं।
3. अंदर वाला ढक्कन या बाहर वाला ढक्कन
- अंदर वाला ढक्कन (इनर लिड): ढक्कन कुकर के अंदर जाता है और प्रेशर इसे अंदर से सील कर देता है, इसलिए प्रेशर रहते हुए इसे खोला ही नहीं जा सकता। इसे लगाने में थोड़ी प्रैक्टिस लगती है, और मुंह थोड़ा संकरा होता है।
- बाहर वाला ढक्कन (आउटर लिड): यह सामान्य ढक्कन की तरह ऊपर बैठता है और घुमाकर लॉक होता है। इसे इस्तेमाल करना और साफ़ करना आसान है, और चलाने व परोसने के लिए मुंह चौड़ा होता है।
BIS स्टैंडर्ड पूरा करने और सही तरीके से इस्तेमाल करने पर दोनों सुरक्षित हैं। जो आपको आसान लगे, वही चुनें।
4. जांचने लायक सुरक्षा फ़ीचर
- ISI मार्क: प्रेशर कुकर को BIS स्टैंडर्ड IS 2347 पूरा करना होता है और उस पर ISI मार्क होना चाहिए। बिना इसके न खरीदें।
- सेफ़्टी वाल्व: भाप निकलने का दूसरा रास्ता (अक्सर धातु या रबर का प्लग), जो मुख्य वेंट बंद होने पर भाप बाहर निकाल देता है।
- गैस्केट रिलीज़ सिस्टम: कुछ कुकर में बहुत ज़्यादा प्रेशर होने पर ढक्कन फेल होने की बजाय गैस्केट एक स्लॉट से बाहर निकल आता है।
- मज़बूत, गर्मी-रोधी हैंडल, जो मज़बूत पेंच से कसे हों, और बड़े कुकर में एक सहायक हैंडल भी।
- स्पेयर पार्ट्स: देख लें कि उस मॉडल के गैस्केट, सीटी और सेफ़्टी वाल्व आसानी से मिल जाते हैं।
5. सुरक्षा की आदतें
- कभी भी दो-तिहाई से ज़्यादा न भरें, और दाल, चावल व झाग बनाने वाली या फूलने वाली चीज़ों के लिए आधे से ज़्यादा नहीं।
- रेसिपी के हिसाब से हमेशा पर्याप्त पानी डालें। खाली कुकर को कभी गर्म न करें।
- हर बार इस्तेमाल से पहले देख लें कि वेंट ट्यूब खुली है। ढक्कन को रोशनी की तरफ़ उठाकर देखें।
- ढक्कन को कभी ज़बरदस्ती न खोलें। प्रेशर को अपने आप कम होने दें, या चम्मच से सीटी को सावधानी से उठाएं, चेहरा दूर रखकर।
- गैस्केट बदलें जब वह सख्त हो जाए, दरार आ जाए या लीक करे, और सेफ़्टी वाल्व बदलें अगर वह खराब हो या कभी फट चुका हो। ओरिजिनल पार्ट्स ही इस्तेमाल करें।
- लौ को कुकर के नीचे ही रखें, किनारों तक न जाने दें, वरना हैंडल खराब हो सकते हैं।
6. सफ़ाई और देखभाल
- एल्युमिनियम: साबुन से धोएं; थोड़ी इमली या नींबू से चमक वापस आ जाती है। इसमें खट्टा खाना रखकर न छोड़ें।
- हार्ड-एनोडाइज़्ड: सिर्फ़ नरम स्पंज और हल्का साबुन इस्तेमाल करें; कड़े स्क्रबर नहीं।
- स्टेनलेस स्टील: इसे रगड़कर साफ़ कर सकते हैं। जले हुए खाने को पहले बेकिंग सोडा और पानी में भिगो दें।
- गैस्केट: हर इस्तेमाल के बाद धोएं, सुखाएं, और अलग से या ढीला रखें ताकि इसका आकार बना रहे।
निष्कर्ष
सही साइज़ खरीदें, लंबे समय तक चलने के लिए सैंडविच बेस वाला स्टेनलेस स्टील चुनें (या गैस पर जल्दी पकाने के लिए हार्ड-एनोडाइज़्ड), ISI मार्क ज़रूर जांचें, और हर बार सुरक्षा की आदतों का पालन करें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
कौन सा बेहतर है: स्टील या एल्युमिनियम प्रेशर कुकर?
स्टेनलेस स्टील ज़्यादा चलता है, टमाटर और इमली जैसी खट्टी चीज़ों से रिएक्ट नहीं करता, और सैंडविच बेस के साथ इंडक्शन पर भी चलता है। एल्युमिनियम हल्का, सस्ता होता है और जल्दी गर्म होता है, लेकिन खट्टे खाने से रिएक्ट कर सकता है और समय के साथ घिसता है। हार्ड-एनोडाइज़्ड एल्युमिनियम इन दोनों के बीच में आता है।
मुझे कितने साइज़ का प्रेशर कुकर चाहिए?
मोटे तौर पर: एक या दो लोगों के लिए 2 से 3 लीटर, तीन से पांच लोगों के परिवार के लिए 3 से 5 लीटर, और बड़े परिवारों के लिए 5 लीटर या उससे ज़्यादा। कई घरों में दो कुकर होते हैं: दाल के लिए छोटा और चावल व ज़्यादा मात्रा के लिए बड़ा।
क्या प्रेशर कुकर पर ISI मार्क ज़रूरी है?
हां। भारत में बिकने वाले प्रेशर कुकर को सरकार के क्वालिटी कंट्रोल ऑर्डर के तहत BIS स्टैंडर्ड (IS 2347) पूरा करना होता है और उस पर ISI मार्क होना चाहिए। ऑनलाइन खरीदते समय भी, बिना ISI मार्क वाला कुकर न खरीदें।
गैस्केट कितनी बार बदलना चाहिए?
जब वह सख्त हो जाए, उसमें दरार आ जाए, ढीला हो जाए या किनारे से भाप निकलने लगे। रोज़ इस्तेमाल होने वाले कुकर में अक्सर यह साल में लगभग एक बार होता है। हमेशा अपने मॉडल के लिए उसी ब्रांड का ओरिजिनल गैस्केट इस्तेमाल करें।